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  • “निदेशक संदेश”

    पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो व राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संस्थान जुड़वां संस्थानों के रूप में 21 सितंबर 1984 को बंगलौर में स्थापित हुए तथा 1985 में करनाल में स्थानांतरित कर दिये गए । राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो को एक एकल इकाई के रूप में कार्य करने के लिए दोनों का वर्ष 1995 में विलय कर दिया गया । यह अग्रणी संस्थान अपने अनुदेश के अनुरूप देश के पशुधन व कुक्कुट आनुवंशिक संपदा की पहचान, मूल्यांकन, लक्षण निर्धारण, संरक्षण व चिरस्थाई उपयोग बढ़ाने वाले कार्यों के प्रति समर्पित है ।

    ब्यूरो ने नवीन अनुसंधान में विशेषता देश के विस्तरित पशुधन जैव विविधता में आनुवंशिक क्षमता की पहचान और उसके सतत विकास के लिए एक लंबी यात्रा का प्रयास आरंभ किया है । प्रमुख उपलब्धियों में 90% से अधिक गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़े, ऊंट, और कुक्कट पंजीकृत नस्लों के आनुवंशिक लक्षण निर्धारण है । विभिन्न नस्लों में विभिन्न प्रतिभागी जीन्स जोकि उत्पादन, पुन्र उत्पादन, पर्यावरण के प्रति अनुकूलता व रोग प्रति रोधात्मक क्षमता पैदा करने के प्रति उत्तरदायी, 1600 एस. एन. पी. से अधिक की पहचान, उत्तर पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र की मणीपुरी भैंस (2N = 48) होने का पता लगना, स्वदेशी गाय और भैंस नस्लों में वाछंनीय ए-2 बीटा केसीन अलील की उच्च आवृति,पशुधन और कुक्कुट नस्लों का पंजीकरण, देशी पशुधन नस्लों पर संरक्षण माइलस तैयार करना और डेटाबेस स्थापित करना प्रमुख उपलब्धियाँ हैं ।

    हमने कुछ कम ज्ञात आबादी वाले देसी पशुओं का भी लक्षण निर्धारण किया है, जिसमे संचोरी, मणिपुरी और बिलाही गाय, गोजरी भैंस और हरिनघटा ब्लैक चिकन, सिघरी बकरी, डेक्क्नी, कजली भेड़ और राजापलायम श्वान शामिल हैं। बड़ी संख्या में बुलेटिनों का प्रकाशन किया गया है, जिसमे विभिन्न प्रजातियों की अधिकतर नस्लों को समावेशित किया गया है विशेष रूप से भूमंडलीकरण और बोद्धिक संपदा अधिकारों के इस युग में नस्ल की मान्यता और दस्तावेजीकरण में इस संस्थान का यह विशेष योगदान है। ब्यूरो ने कृषि पशुओं के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक 151 नस्लों का पंजीकरण किया गया है जिसकी नस्ल विवरणिका भारतीय पशु विज्ञान जर्नल में प्रकाशित की गई है। देसी नस्लों के प्रजनन क्षेत्र में इन-सीटू संरक्षण के लिए नस्ल संरक्षण केन्द्रों की स्थापना, राष्ट्रीय जीन बैंक, डीएनए बैंक, संस्थान स्तर पर एक्स-सीटू संरक्षण के लिए सोमेटिक सेल बैंक की स्थापना आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण तथा पर्यावरणीय दृष्टि से अनुकूलित नस्लों के संरक्षण हेतु सराहनीय कदम हैं। ब्यूरो शोधकर्ताओं, क्षेत्र कार्मिकों, राज्य पशु पालन अधिकारीयों और पशु पालकों हेतु निरंतर विभिन्न राष्ट्रिय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण, व्याख्यान/प्रदर्शनियां और मस्तिष्क उद्वेलन कार्यक्रम आयोजित करता रहता है।

    इस वेबसाइट के माध्यम से उपजी व सांझा की गई विभिन्न पहलुओं से संबंधित जानकारियां मेरे उद्यमी वैज्ञानिकों, तकनीकी, प्रशासनिक और सहायक स्टाफ की मेहनत, लग्न और प्रतिभद्धता का परिणाम है, जिसके लिए वे तारीफ और प्रशंसा के पात्र हैं। संस्थान की वेबसाइट में जाकर जानकारी साँझा करने हेतु हम आपका स्वागत करते हैं। आपकी रचनात्मक प्रतिक्रियाओं और अर्थपूर्ण सुझावों के लिए हम सदैव तत्पर हैं।

    (डॉ.आर्जव शर्मा )
    निदेशक